~ ~ ~ शेर-ओ-शायरी ~ ~ ~
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कितने भागते खपते खपाते,
कितने लहजों से बातें बनाते,
कितने लफ़्ज़ों मे मकसद बताते,
शाम तक आते सब दर किनार कर देते,
कितने हिसाब बही खाते बेकार कर देते,
शाम तक आते सब तेरा इंतिज़ार कर देते!
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