~ ~ ~ शेर-ओ-शायरी ~ ~ ~
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उठो चलो येसु अब ना कोई कीलें गढ़ी हैं,
तुम्हारी सीखें यहाँ बेबस यूँ दलीलें पड़ी हैं,
तुम चढ़े सूली ना भागे कभी,
पर सोए हुए ना जागे कभी,
कितनी बार ‘या रब’ यूँ ज़िद्द पर अड़ी हैं,
उठो जाओ येसु यहाँ और सलीबें खड़ी हैं!
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