Thursday, May 7, 2026

…महीने चार!

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वो ना ख़त्म होते महीने चार

वो चार बार बार

जैसे साल हज़ार

चार महीने आस

चौदह साल बनवास

फिर पहले पाले से

फिर पहले दिवाले से

चक्कर वही घूमे बार बार

सितारों का चक्कर

या हारे का मुक़द्दर

कभी जीते तो सिकंदर

क्या बोले मस्त कलंदर

बस रुको महीने चार

फिर वहीं इंतज़ार

वो ना ख़त्म होते महीने चार

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