Saturday, April 18, 2026

… बूँद दूब बरस!

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अब के जब बरसे तो तुम नंगे पाँव आना,

दूब पे पड़ी बूँदों को अपने पाँव सहलाना,

फिर जो दिल करे बेझिझक करते जाना,

तुमको दूब बूँद का एहसास ख़ास होगा,

मेरा ख़याल होगा और मेरे ही पास होगा,

तुमसे बिछड़ा तो बादल ही तो बना हूँ मैं,

तुमसे मिलने को बूँद दूब बरस पड़ा हूँ मैं!

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Sunday, April 5, 2026

…सलीबें खड़ी हैं!

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उठो चलो येसु अब ना कोई कीलें गढ़ी हैं,

तुम्हारी सीखें यहाँ बेबस यूँ दलीलें पड़ी हैं,

तुम चढ़े सूली ना भागे कभी,

पर सोए हुए ना जागे कभी,

कितनी बार ‘या रब’ यूँ ज़िद्द पर अड़ी हैं,

उठो जाओ येसु यहाँ और सलीबें खड़ी हैं!

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~ ~ ~ the seeker is sought ~ ~

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